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साधक को पकार(sadna ki pukar)part3

साधक को पकार(sadna ki pukar) part3 “क्या हम रुद्र के लिए उसके हृदय को प्यारा लगनेवाला गीत गा बलवान् है ?’ सकेंगे ? यदि गा सकेंगे, तो क्या वह दाता इसे सुनेगा जो ज्ञानी और इमं मे वरुण श्रुधी हवमद्या… Continue Reading →

साधक को पकार(sadna ki pukar)part2

साधक को पकार(sadna ki pukar) Part2 यह आत्मा अपना स्वरूप खोलता है ।’” तो महाराज ! चुनाव का काम तो स्वयं श्राप ही ने करना है । वेद के अन्दर तो आप यह कह ही चुके हैं कि जिस किसी… Continue Reading →

साधक को पकार(sadna ki pukar)

साधक को पकार तेरे द्वार पर बैठे-बैठे कितना समय बीत गया ! क्या मेरी टेर अभी सुनी नहीं गई? सुनते चले आ रहे थे कि यदि भक्त एक पग आगे बढ़ाये तो भगवान दो पग आगे बढ़कर गोदी में ले… Continue Reading →

मुन-मन्दिर का देवता(mn mandr ka davta)part3

मुन-मन्दिर का देवता(mn mandr ka davta) part3 वे एक-दो नहीं, अधिक हैं। इनमें से सबसे पहली श्रेणी में उत्ती होना अत्यन्त आवश्यक है। इस पहली श्रेणी का नाम है, यम। दूस का है, नियम । ये दोनों बड़ी दुर्गम घाटियाँ… Continue Reading →

मुन-मन्दिर का देवता(mn mandr ka davta)part2

मुन-मन्दिर का देवता(mn mandr ka davta) Part2 भजन में मन लगायें तथा स्त्री-जाति के कल्याण के लिए समय दें । ६. अथर्ववेद के तीसरे काण्ड के तीस सूक्त में पारिवारिक जीवन का बहुत सुन्दर चित्र चित्रित किया गया है। हरेक… Continue Reading →

मुन-मन्दिर का देवता(mn mandr ka davta)

दरे मुन-मन्दिर का देवता मेरा पति ही है। इसमें और कोई स्थान नहीं का इतिहास में पतिव्रत-धर्म को आर्य-संस्कृति का विशेष चिह्न माना गया है और ऐसी देवियों को आदर्श के नाम से पुकारा गया है। माता सीता, सती सावित्री,… Continue Reading →

व्यावहारिक बातें (vayavharic bata)

ये कैसे रहती हैं। कितनी कम पढ़ी हैं। कई माताएँ बिलकुल नहीं पढ़ी हूं , देखो उनको। इनका कमरा कैसा मिलेगा, बिस्तर कसा मिलेगा, पात्र मिलेंगे, शौचालय को देखकर आओ, स्नानागार को देखकर आओ, मटके देखकर आओ, सीखो इनसे। ये… Continue Reading →

संस्थागत कार्यों(sansthagat karyo)

1) ता-पिता पर निर्भर ने वाले भारतीय विद्यार्थी माता-पिता के धब् क्षे पढ्फर यद्दे धन कमाने मे अच्छा पुल दरे ज्यें तो पिर जनकी गोय- में जाह बेठ्े ढे। धपने पैरोें के बल एर विद्यन्ध8्यय्यन करत में खड़े दरेके क्… Continue Reading →

परिवर्तित परिचय(parivartit Paricha)

परिवर्तित कर अपना ठीक परिचय न देकर ठहरा । प्रात:काल जेनेवा की ओर चल पड़ा, जहां पहुंच कर गुप्त भाव से वह अपने मित्र के घर में रहा, और अपनी माता की समाधि पर पुष्प चढ़ा कर इंगलैण्ड को चला… Continue Reading →

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