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मानव-शरीर(Manav sarer )part20

उद्गीथ का स्वरूप : संसार में प्रत्येक पदार्थ सपने-सपने स्थान पर गाना गा रहा है । एक पदार्थ का दूसरे से मिलान होता है उसी को उद्गित कहते हैं। जैसे सूर्य का मिलान पृथ्वी से होता है, तो वह भी… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part19

अन्यथा हमारा जीवन अन्धकार में डूबता रहेगा। (पांचवां पुष्प १८-१०-६४ ई०) प्रातःकाल की बेला मे माता अनुसूया तथा अत्रि मुनि एक स्थान पर विराजमान होकर माता गायत्री का अनुसरण किया करते थे। जिस गायत्री से यह संसार रचता है तथा… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part18

को देखता है, तो सोचता है कि मैं पाप करने कहा जाऊ? क्योंकि सब जगह मेरी माता है। यदि माता ने पाप को जान लिया तो दरार दे । ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाने पर वह पवित्र गायत्री उस मानव… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part17

२ – ३-३ दान कर का भी है। दूई को प्राड के हैं। इनके इन इन्द चाई। (पाचवा पुष् १८-१०-६४ ई०) जो कामधेनु है कामधेनु नाम ही सरस्वती बी गोत्र का है । । जब मानव इस अनार में प्रारर… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part16

एक समय भृगु आश्रम पर ऋषियों की सभा में महर्षि मुदगल त महर्षि शांडिल्य जी ने प्रश्न किया कि संसार में योग की कितनी ग्रा है तथा योग के द्वारा योगी अपनी आत्मा को कहां-कहां ले जा सकता है ?… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part15

क्योंकि उसको उनकी अनुभूति होने लगती है। जब प्रकृति होने लगी। तो वह उसको अपने में ग्रहण करने लगता है । जब ग्रहण करता है। से वह तप्त रहता है । नाना वृक्षों के फलों के जो पोषक त जब… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part14

ब्रह्मरन्ध्र के निचले विभाग में पीपल के पत्ते के अर्ध-भाग के सामान एक स्थल होता है। उसमें तीन प्रकार की नाड़ियां होती है २. सिम भुक् और ३. ९ वेतबेतु । इनका सम्बन्ध १-एंड, २-पिगला ? है । उन नदियों… Continue Reading →

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