Tag

Parmatma

पिता का तिरस्कार(pta ka teraskar)part2

पिता का तिरस्कार(pta ka teraskar) Part2 जिसको प्राण भी कहते हैं, शरीर की ऐसी गति बना करके, उस शरीर के आत्मा का उत्थान हो करके, अंतरिक्ष मंडल में जहां सूक्ष्म शरीर वाली महान् आत्माओं के सत्संग द्वारा, उस शरीर द्वारा… Continue Reading →

पिता का तिरस्कार(pta ka teraskar)

पूज्य पिता का तिरस्कार : उस समय जब बालक को अभिमान हो गया तो अन्य त्रयों के समक्ष पहुंचे। सृष्ट मुनि ने कहा, अरे बालक ! या हा तुम्हारी तपस्या में ? उस समय उसने पिता को पिता न जानकर… Continue Reading →

धर्मपाल विद्यालंकार(drampal vdalnkar)part4

धर्मपाल विद्यालंकार(drampal vdalnkar) part4 अत्यधिक प्रसन्नता है कि गुरुकुल झज्जर महाविद्यालय अपने उज्ज्वल इतिहास के सौ वर्ष पूरा का है। इतना लम्बा समय किसी भी व्यक्ति, संस्था और राष्ट्र के उन्नयन के लिये एक विशाल झरोखा है। इस गुरुदुल के… Continue Reading →

धर्मपाल विद्यालंकार(drampal vdalnkar)part3

धर्मपाल विद्यालंकार(drampal vdalnkar) part3 == > भवन म- हये हम अपने देश को गुज समझते हैं। छात्र भी अध्यापक _-मेंट ऍट रहते हैं। हमारे देश के विदिशा शहर से पसीना नहीं निकालना चाहते। जो व्यनि होता है उसका ज्ञान भी… Continue Reading →

धर्मपाल विद्यालंकार(drampal vdalnkar)part2

धर्मपाल विद्यालंकार(drampal vdalnkar) Part2 बादल को घटाओं की तरह धार्मिक मनुष्यों पर परीक्षा लेने के लिए आपत्तिया अत है सजन सिह के पुत्र फतेह सिंह थे। वे अभिमानी थे। उनके दीवान श्यामजी कृष्ण वंमा थ द में श्यामलदास ने कविता… Continue Reading →

धर्मपाल विद्यालंकार(drampal vdalnkar)

धर्मपाल विद्यालंकार और पं० सत्यदेव विद्यालंकार गुरुकुल में पधारे। पं० सत्यव्रत जी ने कहा-गुरुकु प्रणाली खास विचारों की दिशा है। आप का जीवन अध्यात्मवादी है। भारत अपनी विचारधारा के कारण्- जीवित है। संसार की अन्तिम भलाई अध्यात्मवाद और त्याग के… Continue Reading →

सामग्री संग्रहालय(samagri sangria)

कल के ४६ वें वार्षिकोत्सव पर अर्थात १३ फरवरी १९६१ ई० के दिन यह सब सामग्री संग्रहालय ये उद्घाटनार्थ एक छोटे से कमरे में फांसी की थालियों में व्यवस्था से फैलाकर रख दी गई । १३ फरवरी को सायं चार… Continue Reading →

इतिहास शब्द(ithasik sand)par3

इतिहास शब्द(ithasik sand)par3 आदि के कारण किसी अन्य स्थान से आई हुई हैं। कैर ग्राम से मिली मुद्राओं को पढ़ने की इच्छा हुई, परन्तु कोई बताने वाला नहीं था। विवा मथुरा संग्रहालय के निदेशक के पास गये और उन्हें सिर… Continue Reading →

इतिहास शब्द(ithasik sand)par2

इतिहास शब्द(ithasik sand) Part2 जी आचार्य जी के इतिहास विषय में रुचि पैत्रिक दायाद के रूप में मिली है। इनके पिता चौधरो जो इतिहास में विशेष रुचि रखते थे, उन्हीं के संग्रहित ग्रन्थों को पढ़-पढ़कर इनकी रुचि भी इस होती… Continue Reading →

© 2019 Made in Travels

All Rights Reserved — Up ↑