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मानव-शरीर(Manav sarer )part13

जीवन सुखी बने, तथा आनंदित बने । जब मन और प्राण एक स्थली । जाकर सुचारू रूप से कार्य करने लगते हैं, तो मानव के शरीर में कोई नहीं रहता। इसलिए मानसिक चिन्तन ऊंचा होना चाहिए। मन और प्राण को… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part12

बाणी भी उसके साथ कार्य करती है या नहीं ? या उसके जाग्रत होने के पश्चात् वाणी में कुछ प्रोज आ जाता है, या अात्मिक शक्ति का जागरण हो जाता है ? ऋतम्भरा द्वारा परमात्मा से मिलान होने पर योगी… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part11

हो करके प्रभु के आनंद में बिखरने लगा है । वे कर्म प्रकृति के अ्रांगन में रमण कर जाते हैं, (उस) आत्मा के समीप नहीं रहते। (पच्चीसवां पुष्प ११-११-७२ ई०) मन और प्राण को एक सूत्र में लाने के लिए… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part10

प्राचार्य आदि का निर्णय कराता है । वेदों का भी चार विभागों में विभा- जन कर देता है। धारणा नाम उसी को कहा है, जब पुनः से संसार एक प्रीत करके मन में प्राण का मिलान हो जाता है। प्रकृति… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part9

प्रश्न यह गाता है कि आत्मा के निकल जाने पर तो यह शरीर शून्य होकर मृत्यु को प्राप्त हो जाता है तो फिर उस शरीर का क्या बनेगा। इसका उत्तर यह है कि वह पवित्र आत्मा, जिसका सम्बन्ध अन्त रिक्ष… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part8

क. इसके पश्चात मूलाधार में रमण करता है तो आत्मा की रूप रेखा बहुत सूक्ष्म वन जाती है । सूक्ष्म वन जाने के कारण वहां पहुंचती है, जिसको रीढ़ कहते हैं। इसको “भूरभुव: निरीक्षणी रूपकम्’ कहते हैं । योगियों ने… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part7

जब मानव कमेंट करता हुशार ध्यान में लीन हो जाता है, मग्न होने के पश्चात् प्रागे समाधि में लय होने लगता है, तो इसकी यह जानने की इच्छा होती है कि प्रात्मा गौर प्राणों की संधि कैसे होती है (… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part6

ता । इसीलिए हमें दोनों पर विचार ना चाहिए । हुन आत्मा, मन और प्राण तीनों को मूलाधार, नाभि, हृदय, कष्ठ, घ्राण, ब्रह्मरन्ध्र म ले नाना है। हमें उन प्रभावों पर विचार-विनिमय करने वाला बनना चाहिए। जिनके सम्बन्ध से हमारा… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part5

गे तीनों प्रकार की चिकित्सा गरे पह। पपरा ग बली प्राती है। जितनी चिकित्सा है वह सब प्राणी के अंतर्गत प्रति ह मयोंकि औपधि में प्राण-शक्ति है। इसलिए वह चिकित्सा भी प्राण के द्वारा उदयुध होती है। जो प्राण किया… Continue Reading →

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