मानव-शरीर(Manav sarer )part24

औषधियां, इसका पात बना करके, उनकी अग्नि में भस्म बना करके और मधु के द्वारा पान करने से उतनी ही गति बलवती हो जाती है। परन्तु साथ में संयम, ब्रह्मचर्य की आभा से और उसको पान करने से हृदय में… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part23

उत्तर :-इसका उत्तर यह है कि यद्यपि प्रकृति को पूर्ण माना जाता है । परन्तु जो वस्तु प्रकृति और चेतन के मिलान से बनती है वह सदैव पथरी रहती है । इन्द्रियां प्रकृति से बनी है। आत्मा का सम्बन्ध प्रकृति… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part22

हम परमात्मा की उपासना करते हुए, अन्नों को पान करते हुए चले जाएं, जिससे हमारा जीवन अग्निमय ज्योतिमय बनता हुआ इस संसार सागर से पार हो जाए । (चौदहवाँ पुष्प-१३-८-७० ई.) | ८-संकल्प-शक्ति : यह मन हमारे आहार-व्यवहार से उत्पन्न… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part21

जब राष्ट्र में पुरोहित होते हैं तो एक दूसरे प्राणी की रक्षा होती है। तथा वे प्राणी पुरोहित की रक्षा करते हैं। इस प्रकार राष्ट्र का प्राण है समाचार तथा दूसरों की रक्षा करना। । शेष तीन आत्मा के अन्न… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part20

उद्गीथ का स्वरूप : संसार में प्रत्येक पदार्थ सपने-सपने स्थान पर गाना गा रहा है । एक पदार्थ का दूसरे से मिलान होता है उसी को उद्गित कहते हैं। जैसे सूर्य का मिलान पृथ्वी से होता है, तो वह भी… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part19

अन्यथा हमारा जीवन अन्धकार में डूबता रहेगा। (पांचवां पुष्प १८-१०-६४ ई०) प्रातःकाल की बेला मे माता अनुसूया तथा अत्रि मुनि एक स्थान पर विराजमान होकर माता गायत्री का अनुसरण किया करते थे। जिस गायत्री से यह संसार रचता है तथा… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part18

को देखता है, तो सोचता है कि मैं पाप करने कहा जाऊ? क्योंकि सब जगह मेरी माता है। यदि माता ने पाप को जान लिया तो दरार दे । ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाने पर वह पवित्र गायत्री उस मानव… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part17

२ – ३-३ दान कर का भी है। दूई को प्राड के हैं। इनके इन इन्द चाई। (पाचवा पुष् १८-१०-६४ ई०) जो कामधेनु है कामधेनु नाम ही सरस्वती बी गोत्र का है । । जब मानव इस अनार में प्रारर… Continue Reading →

मानव-शरीर(Manav sarer )part16

एक समय भृगु आश्रम पर ऋषियों की सभा में महर्षि मुदगल त महर्षि शांडिल्य जी ने प्रश्न किया कि संसार में योग की कितनी ग्रा है तथा योग के द्वारा योगी अपनी आत्मा को कहां-कहां ले जा सकता है ?… Continue Reading →

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